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Aids kaise hota hai | एड्स कैसे होता है ?| एड्स/एचआईवी से बचाव

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Aids kaise hota hai एड्स एक जानलेवा और गंभीर सिंड्रोम (syndrome) है। बहुत से लोग इसे बीमारी या रोग बोल देते हैं। परंतु असल में एड्स सिंड्रोम है ना की बीमारी। बीमारी और सिंड्रोम में फर्क होता है। इसके बारे में आगे विस्तार से जानेंगे। इस पोस्ट में हम यह भी जानेंगे कि aids kaise hota hai.

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ऑफिशियल्स रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल लगभग 10 लाख लोग एड्स के कारण अपनी जान गवाते हैं। ना केवल यह जानलेवा है बल्कि तेजी से फैलने वाला संक्रमण भी है। इसके फैलने की तीव्र गति का इस बात से ही पता लगाया जा सकता है कि सन 2020 में लगभग 15 लाख एड्स से ग्रस्त हुए हैं। सन 2020 में 680000 लोगों ने एड्स के कारण अपनी जान गवाई।

हर साल AIDS को लेकर हजारों जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इनके तहत सभी लोगों को AIDS के प्रति जागरूक किया जाता है। AIDS जागरूकता अभियान के तहत लोगों को बताया जाता है AIDS kya, kyo or kaise hota hai or AIDS se kaise bache.

अभी भी एड्स पूरे विश्व के लिए जानलेवा खतरा बनी हुई है। आज इस पोस्ट में हम जानेंगे एड्स क्या होता है, एड्स कैसे होता है ( AIDS kaise hota hai) , AIDS full form, AIDS से कैसे बचा जा सकता है और भी बहुत कुछ। इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको इससे संबंधित प्रत्येक जानकारी मिल जाएगी।

इस आर्टिकल को आसान शब्दों में लिखा गया है। ताकि आसानी से समझा जा सके। इस आर्टिकल में मौजूद जानकारी का उपयोग AIDS essay in Hindi ( एड्स पर निबंध) के लिए भी कर सकते हैं।

Full Form Of AIDS in Hindi | What is Full Form of AIDS

AIDS की Full form acquired immuno deficiency syndrome है।

एड्स के बारे संपूर्ण जानकारी इसकी फुल फॉर्म पढ़ कर ही पता लग जाती है।

Acquired– acquired का अर्थ होता है किसी से लिया गया। एड्स का वायरस अपने आप किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में नहीं पनपता है। एड्स का वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। एक स्वस्थ व्यक्ति इस वायरस को रोगी व्यक्ति से एक्वायर करता है इसलिए इसे एक्वायर्ड कहा जाता है।

Immuno– इम्यूनो शब्द का अर्थ इम्यूनिटी से होता है। इम्यूनिटी का अर्थ रोग प्रतिरोधक क्षमता या रोग प्रतिरोधी प्रणाली होता है। क्योंकि एड्स सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। इसीलिए एड्स की फुल फॉर्म में इम्यूनो शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

Deficiency– डेफिशियेंसी का अर्थ होता है किसी चीज की कमी हो जाना। एड्स ग्रस्त रोगी के शरीर में इम्यूनिटी प्रदान करने वाले सेल्स CD4 सेल्स की कमी हो जाती है।

Syndrome– एचआईवी/एड्स सिंड्रोम होता है ना की बीमारी। सिंड्रोम और बीमारी दो अलग चीज होती है।

कई बीमारियों के कारण उत्पन्न हुए लक्षणों के समूह को सिंड्रोम कहा जाता है। सिंड्रोम में लक्षणों के कारण का पता लगा पाना मुश्किल होता है। जब की बीमारी में कुछ खास प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं। परंतु सहूलियत के लिए हम एड्स रोग शब्द का इस्तेमाल करेंगे।

एचआईवी/ एड्स क्या है? | What is AIDS in Hindi

AIDS बहुत ही जानलेवा और गंभीर बीमारी है जिसके कारण लाखों लोग अपनी जान गवाते हैं। यह एक प्रकार का संक्रमण है जो कि एचआईवी वायरस के कारण होता है। जब भी किसी व्यक्ति में एचआईवी वायरस प्रवेश कर जाता है तो उसे एचआईवी पॉजिटिव या एचआईवी का रोगी माना जाता है। यह वायरस एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर में संक्रमण शुरू करता है। संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर एड्स हो जाता है।

एचआईवी वायरस के कारण शरीर में खुद कोई बीमारी नहीं होती है। बल्कि एचआईवी वायरस रोगी की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को क्षीण (destroy) कर देता है। जब रोगी व्यक्ति की इम्युनिटी वीक होने लगती है तो अपने आप ही कई प्रकार के इन्फेक्शन, वायरस अटैक बैक्टीरियल अटैक होते हैं। इन सब प्रकार के अटैक होने के कारण रोगी प्राय हमेशा बीमार ही बना रहता है।

एक स्वस्थ व्यक्ति पर भी बाहरी बैक्टिरियल अटैक होते हैं परंतु व्यक्ति का इम्यून सिस्टम इतना मजबूत होता है कि बाहरी परजीवी को शरीर में घुसते ही नष्ट कर देता है। परंतु एड्स ग्रस्त व्यक्ति का इम्यून सिस्टम वीक होने के कारण शरीर को बीमार होने से नहीं बचा पाता है।

HIV & AIDS की शुरुआत कैसे हुई ? | History of HIV& AIDS

ऐसा माना जाता है एचआईवी वायरस की उत्पत्ति अफ्रीकी महाद्वीप में हुई है। बहुत सालों तक यह डिबेट का विषय रहा कि एचआईवी वायरस इंसानों में कैसे आया। परंतु 40 सालों से भी ज्यादा की रिसर्च के बाद इसके पुख्ता सबूत मिल चुके हैं कि एचआईवी वायरस इंसानों में कैसे आया?

1999 में गहन शोध के बाद यह निष्कर्ष निकला कि 1920s के दशक में चिंपांजी में पाए जाने वाला SIV (Simian Immunodeficiency Virus) वायरस मनुष्य में प्रविष्ट होकर HIV वायरस बन गया।

असल में हुआ यूं कि, अफ्रीका में चिंपांजी की खास नसल पाई जाती है जिसमें SIV नाम का वायरस पाया जाता है। ये वायरस चिंपांजी के इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है ठीक जैसे एचआईवी इंसानों के इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। HIV और SIV वायरस दोनों का genetic makeup भी लगभग एक जैसा ही है। दोनों दिखने में बहुत ही समान है।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि 1920 के दशक में लोग इन SIV संक्रमित चिंपांजीयों का शिकार किया करते थे। इन चिंपांजी में मौजूद SIV वायरस इंसानों के शरीर में दाखिल हुआ। उस वक्त इंसानों का इम्यून सिस्टम SIV वायरस के खिलाफ लड़ने में पूरी तरह सक्षम था। शरीर में इस वायरस का प्रवेश होते ही इम्यून सिस्टम ने इस वायरस को नष्ट कर दिया । इंसानों में संक्रमण फैलाने में यह नाकाम था।

इसलिए समय के साथ-साथ इवोल्यूशन (जिसे आसान शब्दों में बेहतर बनने की प्रक्रिया भी कहा जा सकता है) ने इस वायरस को नया रूप दिया। इवोल्यूशन के साथ SIV वायरस के जेनेटिक मैटेरियल RNA में कुछ ऐसे बदलाव हुए जो इंसानों को संक्रमित करने के लिए पूरी तरह सक्षम थे। यह SIV वायरस की नई कसम थी जो इंसानों में संक्रमण फैलाने के लिए SIV से एडवांस थी। यह पूरी तरह से नया वायरस था जिसे एचआईवी वायरस नाम दिया गया।

एचआईवी क्या है | What is HIV& full form ?

HIV की फुल फॉर्म (Human Immunodeficiency Virus). जैसा कि नाम से ही पता लगता है यह एक प्रकार का वायरस है। यह एचआईवी वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर संक्रमण फैलाना शुरु करता है ।आसान शब्दों में यह खुद की वृद्धि करता है।

HIV वायरस का एक बहुत ही खास गुण यह है कि यह स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में मौजूद CD4 cells को नष्ट करता है। यह सेल्स इम्यून सिस्टम का बहुत जरूरी हिस्सा है।

एक स्वस्थ व्यक्ति में CD4 सेल्स की संख्या 500 to 1,600 per cubic millimeter होती है। जैसे ही किसी स्वस्थ शरीर पर HIV वायरस का हमला होता है, तब CD4 सेल्स की संख्या तेजी से घटने लगती है। जिस व्यक्ति के शरीर में एचआईवी वायरस पाया जाता है उस व्यक्ति को एचआईवी संक्रमित व्यक्ति कहा जाता है।

जब संक्रमित व्यक्ति की CD4 संख्या 200 से कम हो जाती है तब उस व्यक्ति को एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ-साथ एड्स ग्रस्त रोगी भी कहा जाता है। यदि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के CD4 सेल्स की संख्या 200 से अधिक हो तब उसे एड्स रोगी नहीं कहा जा सकता।

एचआईवी संक्रमण की stages

एचआईवी वायरस किसी स्वस्थ व्यक्ति के भीतर प्रवेश करने के 2 हफ्ते बाद अपनी वृद्धि शुरू करता है। कुछ ही समय में एक cell से
लाखों एचआईवी वायरस प्रोड्यूस कर देता है।

अभी तक एचआईवी को पूरी तरह खत्म करने में सफलता हाथ नहीं लगी है। पंरतु antiretroviral therapy or ART के जरिए एड्स से होने वाली असमय मौतों को रोका जा सकता है।

U.S. Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के द्वारा एचआईवी वायरस संक्रमण को 3 चरणों में बांटा गया है। जबकि who द्वारा एचआईवी की 4 stages बताई गई हैं। HIV stages ko
रक्त में CD4 सेल्स की संख्या के हिसाब से बांटा गया है।

CDC के हिसाब से HIV की 3 stages हैं।

1. Acute HIV Infection

यह एचआईवी संक्रमण की पहली स्टेज है। यह स्टेज एचआईवी वायरस से संक्रमित होने के 2 से 4 हफ्ते बाद देखने को मिलती है। इस दौरान एचआईवी वायरस बहुत तेजी से खुद की वृद्धि करता है और पूरे शरीर में फैल जाता। इस दौरान एचआईवी वायरस immune cells को भी नष्ट करने लगता है। इस दौरान रोगी व्यक्ति में किसी आम फ्लू जैसे लक्षण ही देखने को मिलते।

इस stage के दौरान शरीर में एचआईवी वायरस की तादाद सबसे अधिक होती है। इस दौरान रोगी व्यक्ति को जितना हो सके isolated condition में रहना चाहिए। इस वक्त इस बात की सबसे अधिक संभावना होती है कि संक्रमित व्यक्ति किसी स्वस्थ व्यक्ति में संक्रमित कर सकता है। इस चरण में यदि ART therapy शुरू कर दी जाए तो इस बीमारी से मृत्यु होने की संभावना बहुत हद तक टल जाती है।

2. Chronic HIV Infection

इसे asymptomatic HIV infection or clinical latency) भी कहा जाता है। जैसा की नाम से ही पता लगता है यह asymptomatic होता यानी कि बिना लक्षण वाला। यह बहुत ही अजीब बात है कि इस चरण में संक्रमित व्यक्ति के शरीर में कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिलता है।

इसे stage पर अगर ART therapy ना ली जाए तो इस चरण से अगले चरण तक पहुंचने में 8 से 10 साल का समय लग सकता है। परंतु बुरी बात यह है कि कुछ व्यक्तियों में यह क्रिया तेजी से होती है।

इस चरण की एक अच्छी बात यह है कि इस चरण में जो भी व्यक्ति आर्ट थेरेपी और prescribed medicines लेता है उसकी बचने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इससे भी अच्छी बात यह है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति माता पिता बनने का सुख भी भोग सकता है। फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष वह पूरी तरह स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकता है। उस एचआईवी संक्रमित व्यक्ति से बच्चे में एचआईवी संक्रमण नहीं होता है। परंतु इसके लिए proper medication जरूरी है।

3. AIDS

एचआईवी संक्रमण की तीसरी, आखरी और सबसे खतरनाक स्टेज एड्स है। इस स्टेज में CD4 cells की संख्या 200 cells/mm3 से कम रह जाती है। इस स्टेज तक रोगी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बहुत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त और नष्ट हो चुका होता है। मामूली वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण भी शरीर बीमार पड़ जाता है। मामूली से मामूली बैक्टीरिया भी व्यक्ति को infection करके बीमार कर देता है।

आमतौर पर helicobacter pylori बैक्टीरिया व्यक्ति को तीन से चार महीनों के लिए बीमार कर पाता है परंतु एड्स ग्रस्त रोगी का इम्यून सिस्टम इतनी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका होता है कि यह मामूली सा बैक्टीरिया व्यक्ति में पेट का कैंसर कर देता।

एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की सबसे ज्यादा मौत Tuberculosis (TB) कारण होती है।

Three stages of HIV according to CDC

Stages according to CDC CD4 cell count
Stage 1- Acute HIV Infection More than  500 cells per microliter
Stage 2- Chronic HIV Infection Between 200 to 499
Stage 3- AIDS Lower than 200

4 stages of HIV according to WHO

Stages according to WHO CD4 cell count per microliter
Stage 1- HIV infection More than  500
Stage 2- HIV infection Between 350 to 499
Stage 3- advanced HIV disease, or AHD Between 200 to 349
Stage 4- AIDS Less than 200

एचआईवी/एड्स के लक्षण ( HIV/AIDS symptoms in Hindi)

एड्स के दौरान शरीर में अलग-अलग stages के दौरान अलग अलग लक्षण देखने को मिलते हैं।

Aids symptoms in First Stage:

  • Fever ( बुखार होना, शरीर हमेशा गर्म रहना)
  • Chills ( कमकंपी महसूस होना)
  • Rash ( त्वचा पर लाल धब्बे पड़ जाना)
  • Night sweats ( रात में शरीर पसीने से गीला हो जाना)
  • Muscle aches ( मांशपेशियों में जकड़न मेहसूस होना)
  • Fatigue ( हमेशा थकान मेहसूस होना)
  • Mouth ulcers ( मुंह में छाले होना)

Symptoms in second stage:

सेकंड स्टेज में एचआईवी के किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं देखने को मिलते हैं। एचआईवी वायरस पूरी तरह से शरीर का हिस्सा बन जाता है। इस स्टेज में वायरस immune system को नष्ट करता रहता है।

Third stage symptoms

एड्स एचआईवी की तीसरी स्टेज होती है। इसमें व्यक्ति का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से क्षीण हो चुका होता है। जिसके कारण व्यक्ति बहुत आसानी से कई प्रकार की बीमारियों का शिकार होने लगता है। इन बीमारियों के कारण ही रोगी व्यक्ति लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • व्यक्ति को हमेशा कमजोरी महसूस होती रहती है।
  • व्यक्ती बहुत आसानी से बीमार पड़ जाता है।
  • गले में सूजन के कारण गांठ बन जाती है।
  • व्यक्ति पूरी तरह से सूख जाता है।
  • वजन कम हो जाता है।
  • व्यक्ति को चलने फिरने में भी तकलीफ होने लगती है।
  • रोगी सारा दिन सुस्ती महसूस करता है और लेटा रहता है।
  • सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • 3 से 4 महीने तक डायरिया बना रहता है जो कि आमतौर पर 1 महीने से कम में ठीक हो जाता है।
  • मुंह और जननांगों में इन्फेक्शन
  • मुंह, होंठ और त्वचा से बिना मतलब के खून निकलना।
  • दिमाग से जुड़ी हुई समस्या जैसे चक्कर आना, सुनने बोलने में तकलीफ होना, कुछ भी समझने में तकलीफ होना, नेत्र शक्ति कमजोर हो जाना।

एचआईवी / एड्स कैसे होता है?

एचआईवी वायरस के कारण एड्स होता है। ये एचआईवी वायरस केवल और केवल मनुष्यों के द्वारा फैलता है। ( हालांकि कुछ जानवरों में भी एचआईवी वायरस पाया गया है)

एचआईवी वायरस संक्रमित व्यक्ति के semen, blood, rectal fluid, vaginal secretions, and breast milk से स्वस्थ व्यक्ती में फैलता है। एचआईवी/ एड्स मुख्यत body fluids से एक व्यक्ती से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। urine और saliva से एचआईवी नहीं फैलता है क्योंकि इसमें enzymes और acids की ज्यादा मात्रा के कारण एचआईवी पनप नहीं पाता है।

एक व्यक्ती से दूसरे व्यक्ति में एड्स निम्नलिखित कारणों से होता है:

1. सेक्स से aids kaise hota hai ?

प्राकृतिक और गैर प्राकृतिक यौन संबंध के दौरान चार अंग शामिल होते हैं। इन चारों अंगो में तरल पदार्थ होता है। जैसे की

लिंग में सीमेन और precum तरल होता है।
योनि में vaginal fluid होता है।
गुदा में rectal fluid होता है।
मुख में saliva

लिंग, योनि, गुदा ( पुरुष महिला दोनों) में मौजूद तरल में एचआईवी वायरस होता है। saliva और पेशाब में एचआईवी वायरस नही होता हैं।

एड्स फैलना या होने का सबसे बड़ा कारण unprotected Sex है। anal sex के द्वारा एड्स होने के संभावना vagina sex से भी ज्यादा होती है।

यदि एक संक्रमति व्यक्ती का लिंग का तरल पदार्थ ( सीमेन और precum) स्वस्थ वक्ति के योनि या गुदा के संपर्क में आता है तो स्वस्थ व्यक्ति को एचआईवी होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिंग के तरल पदार्थ से पुरुष भी एचआईवी पॉजिटिव हो जाता है।

यदि एक संक्रमित योनि का तरल पदार्थ स्वस्थ पुरुष/महिला के लिंग या गुदा के संपर्क में आता है तो स्वस्थ व्यक्ति को एचआईवी पॉजिटिव होगा।

यदि एक संक्रमित व्यक्ति का गुदा तरल स्वस्थ व्यक्ती के गुदा, लिंग या योनि के संपर्क में आता है तो स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित होगा।

यदि एक संक्रमित व्यक्ति के लिंग, गुदा, योनि का तरल पदार्थ मुख के संपर्क में आता है तो भी स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण होने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख और पेट में एचआईवी का वायरस survive नही कर पाता है। परन्तु यदि व्यक्ती के मुंह में चोट या open wound हो तो वायरस रक्त में प्रवेश कर सकता है और व्यक्ती को एचआईवी संक्रमित कर सकता है । हालांकि इसकी होने के संभावना काफी कम है। परन्तु पुरी तरह शून्य नहीं है।

2. चुम्बन करने से hiv aids kaise hota hai?

WHO की रिपोर्ट्स के अनुसार आज तक किसी व्यक्ती को मुख चुम्बन से एचआईवी एड्स नहीं हुआ है। पंरतु यह भी चेताया है की इसकी होने की संभावना पूरी तरह शून्य नहीं है। संक्रमित के मुख में मौजूद एचआईवी वायरस किसी दूसरे व्यक्ति के मुख में जाकर स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ऐसा तभी मुमकिन है जब दोनों व्यक्तियों की मुख्य में चोट घाव या open wounds हों। इन open wounds से एचआईवी वायरस saliva में मिल जाता है और किसी दूसरे व्यक्ति के मुख में मौजूद open wound से रक्त में प्रवेश कर सकता है।

3. Injection se AIDS kaise hota hai?

बहुत सारे लोग इंजेक्शन का इस्तेमाल ड्रग्स लेने के लिए करते हैं। यदि एक‌ स्वस्थ व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किया हुआ injection उपयोग में लाता है तो स्वस्थ व्यक्ति भी एचआईवी संक्रमित हो जाता है। ‌इसीलिए एक इंजेक्शन का केवल एक बार इस्तेमाल करना चाहिए

4. ब्लड ट्रांसफ्यूजन se aids kaise hota hai?

यदि एक HIV संक्रमित व्यक्ति का खून स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाया जाता है तो भी स्वस्थ व्यक्ति एचआईवी संक्रमित हो जाता है। पहले के समय में यह एड्स होने का बहुत बड़ा कारण था। परंतु अब एडवांसमेंट के साथ ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने से पहले ब्लड की अच्छे से जांच की जाती है। इसी प्रकार ऑर्गन ट्रांसप्लांट के दौरान भी एचआईवी संक्रमण हो सकता है।

5. Pregnancy or Breastfeeding se AIDS kaise hota hai?

एक स्वस्थ शिशु को एचआईवी संक्रमित माता से एड्स संक्रमण हो सकता है। ऐसा गर्भ काल में, डिलीवरी के समय, स्तनपान के दौरान हो सकता है। परंतु गनीमत है कि मेडिकल फैसिलिटी में सुधार के साथ यह होने की संभावना बहुत ही कम रह गई है। एक एचआईवी संक्रामित महिला भी स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है और उसे अपना दूध पिला सकती है।

6. Tattoos and piercings se aids kaise hota hai?

टैटू बनाते वक्त यदि एक सुई का बार-बार इस्तेमाल किया जाए तब भी संक्रमण फैलता है।

7. Bite se aids kaise hota hai?

यदि एक संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ व्यक्ति को काट ले और उसे खून आ जाए तो भी एचआईवी संक्रमण फैलता है।

HID / AIDS kaise nahi hota hai?

  1.  Skin-to-skin contact– व्यक्ति को छूने से एड्स नहीं होता है, जैसे कि hugging, shaking hands or kissing
  2.  Air or water– एचआईवी वायरस हवा और पानी के माध्यम से भी नहीं मिलता है।
  3.  Sharing food drinking fountains– संक्रमित व्यक्ति के साथ बैठकर खाना भी पूरी तरह सुरक्षित है। परन्तु झूठा खाना खाने से बचें।
  4.  Saliva, tears and sweat – इन तीनों तरल पदार्थों में एचआईवी वायरस नहीं होता है। जब तक की इनमें रक्त ना मिला हो।
  5.  Toilet, towels, or bedding– एक साथ सोने, एक टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करने या फिर कपड़ों का इस्तेमाल करने से भी एचआईवी संक्रमण नहीं फैलता है।
  6.  Mosquitoes– यदि एक संक्रमित व्यक्ति को मच्छर काटता है और वही मच्छर दूसरे स्वस्थ को जाकर काट लेता है तो भी एचआईवी संक्रमण नहीं फैलता है।

एचआईवी/एड्स के जोखिम कारक – HIV/AIDS Risk Factors in Hindi

Multiple sex partners वाले व्यक्तियों में एड्स होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

Rectal sex में vaginal sex के मुकाबले एचआईवी संक्रमण होने की संभावना ज्यादा होती है। सबसे ज्यादा एचआईवी इंफेक्शन पुरुषों में रेक्टल सेक्स के दौरान ही फैलता है।

पुरुषों में एड्स होने की संभावना महिलाओं से ज्यादा होती है। सन 2018 में 69% gay mens एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे।

pregnancy के वक्त अनजाने में ही कई बार माताओं से शिशु को एचआईवी संक्रमण हो जाता है।

सबसे ज्यादा एचआईवी संक्रमण होने की संभावना अफ्रीकन, अमेरिकन और एशिया द्वीप के इंडियन लोगों को होती है। हालांकि एचआईवी एड्स के रोगी पूरे विश्व में पाए जाते हैं।

एड्स ज्यादातर 50+ की उम्र के लोगों में पाया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि एचआईवी संक्रमित होने के बाद एड्स स्टेज पहुंचने में 10 से 12 साल का समय लगता है। हालांकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो जाता है।

इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स सेवन करने वाले व्यक्तियों में भी एड्स होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।

एचआईवी/एड्स से बचाव – Prevention of HIV/AIDS in Hindi

एड्स फैलने का मुख्य कारण body fluid secretions होते हैं। यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में आमतौर पर सेक्सुअल एक्टिविटीज के दौरान फैलते हैं। एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए अनप्रोटेक्टेड सेक्स को पूरी तरह से वर्जित करें। गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें।

टैटू करवाते वक्त sterilized equipment का इस्तेमाल करें।

एक सुई का इस्तेमाल केवल एक बार ही करना चाहिए।

family planning से पहले माता और पिता दोनों की जांच जरूर करानी चाहिए।

एचआईवी/एड्स का इलाज – HIV/AIDS Treatment in Hindi

एचआईवी / एड्स का इलाज पूरी तरह संभव है। पहले के समय ऐसा माना जाता था जिस व्यक्ति को एचआईवी हो गया उसकी मृत्यु निश्चित है। परंतु अब ऐसा नहीं है। मेडिकल टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट के साथ कई सारी antiretroviral therapy medications
मौजूद है। प्रॉपर मेडिकेशंस का इस्तेमाल करके एचआईवी से बचा जा सकता है।

FAQ

एड्स का अंतरराष्ट्रीय चिन्ह क्या है?

एड्स का अंतरराष्ट्रीय चिन्ह The red ribbon ( लाल रंग का रिब्बन) है।

विश्व एड्स दिवस क्यों मनाया जाता है?

विश्व एड्स दिवस हर साल 1 दिसंबर को लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। एड्स जागरूकता दिवस का कार्यक्रम 7 दिन तक लगातार चलता है। इस दौरान एड्स के स्कूलों, विद्यालयों, कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इन जागरूकता अभियान में यह बताया जाता है एड्स क्या होता है, एड्स कैसे होता है और ऐड से कैसे बचा जा सकता है।

1 दिसंबर विश्व एड्स दिवस पर निबंध लिखिए

इस आर्टिकल एड्स कैसे होता है में एड्स के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। आर्टिकल का इस्तेमाल विश्व एड्स दिवस पर निबंध लिखने के लिए भी किया जा सकता है। इस आर्टिकल को आसान शब्दों में निबंध की तरह लिखा गया है।

एड्स की रोकथाम के 3 उपाय

अनप्रोटेक्टेड सेक्स से बचें। एड्स का सबसे बड़ा कारण अनप्रोटेक्टेड सेक्स है। इसलिए इस से बचें। संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूड से बचें Multiple sex partners के साथ संबंध ना रखें। फैमिली प्लानिंग करने से पहले HIV testing जरूर करवाएं।

एड्स का इलाज है या नहीं ?

एड्स का इलाज अभी तक पूरी तरह संभव नहीं है। अभी भी बहुत सारे लोग एड्स के कारण हर साल अपनी जान गवाते हैं। ऐसी कोई दवाई या इंजेक्शन की खोज नहीं हुई है जिसका इस्तेमाल करके एचआईवी के वायरस को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। परंतु ध्यान देने वाली बात यह है कि ज्यादातर उन व्यक्तियों की मौत होती है जो सही समय पर उपचार नहीं लेते हैं। एचआईवी उपचार के लिए ART therapy दी जाती है। यह आर्ट थेरेपी मुख्य 6 प्रकार की होती है। art therapy के तहत मेडिसिंस, इंजेक्शन सिरम शरीर में दाखिल कराए जाते हैं। यह लगातार छह महीने तक चलती है। 6 महीने तक आर्ट थेरेपी के बाद संक्रमित व्यक्ति के शरीर से सैंपल लिया जाता है। यदि सैंपल में वायरल लोड (वायरस की संख्या) 0 पाई जाती है तो उस व्यक्ति कि एचआईवी से होने वाली मृत्यु की संभावना ना के बराबर होती है। जिस एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का वायरल लोड 0 होता है वह स्वस्थ व्यक्ति को किसी भी माध्यम से संक्रमित नहीं कर सकता। वह एचआईवी पॉजिटिव इंसान जिसका वायरल लोड जीरो है वह स्वस्थ बच्चा पैदा कर सकता है चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला।

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