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ब्लड कैंसर कैसे होता है | Blood cancer kaise hota hai

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ब्लड कैंसर कैसे होता है, blood cancer type and preventions: भारत एक विशाल देश है जिसकी आबादी सवा सौ करोड़ से अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की मृत्यु दर में काफी सुधार आया है। परंतु अभी भी ब्लड कैंसर से होने वाली मौतों के आंकड़ों को देखकर सरकार और हेल्थ डिपार्टमेंट चिंतित है। ब्लड कैंसर को रक्त कैंसर और ल्यूकेमिया के नाम से भी जाना जाता है।

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ब्लड कैंसर से सालाना होने वाली मौतों में भारत तीसरे नंबर पर जबकि पहला स्थान USA और चाइना का है।

भारत में हर साल ल्यूकेमिया से होने वाली मौतों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इसलिए ब्लड कैंसर के बारे में जानना समझना बहुत जरूरी है। आज इस पोस्ट में हम यह जानेंगे ब्लड कैंसर क्या होता है (blood cancer kaise hota hai ?) ब्लड कैंसर कैसे होता है?ब्लड कैंसर सिंपटम्स इन हिंदी? ब्लड कैंसर से कैसे बचा जा सकता है?

इंडिया टुडे के मेडिकल जनरल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार यदि लोगों को यह पता हो ब्लड कैंसर कैसे होता है तो सालाना होने वाली मौतों में 30% तक की गिरावट आ सकती है। ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाकर काफी हद तक ब्लड कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है?

ब्लड कैंसर क्या होता है, जानने से पहले हमें यह जानना होगा कि कैंसर क्या होता है?

कैंसर क्या होता है?

हमारे शरीर में बहुत सारी रक्त कोशिकाएं और सेल्स पाए जाते है। शरीर की ग्रोथ के लिए इन कोशिकाओं में लगातार division होती रहती है। कोशिका विभाजन से दो कोशिकाओं का निर्माण होता है । हर समय शरीर में लाखों कोशिकाओं का निर्माण होता रहता है। नई कोशिकाओं के निर्माण के साथ-साथ पुरानी कोशिकाएं नष्ट होती रहती है।

इस प्रकार कोशिकाओं के बनने और नष्ट होने की प्रक्रिया चलती रहती है। परंतु कई बार एक स्थान पर बहुत सारी कोशिकाओं का निर्माण हो जाता है। जिसकी वजह से वहां पर गांठ बन जाती है। इसी अनियंत्रित कोशिका विभाजन को कैंसर कहा जाता है।

ब्लड कैंसर और ल्यूकेमिया क्या है? |( Blood cancer -Leukemia in hindi)

जैसा कि नाम से पता लगता है, ब्लड कैंसर शरीर के रक्त (ब्लड सेल्स) से संबंधित कैंसर है। शरीर में पाए जाने वाले रक्त सेल्स का निर्माण bone marrow में होता है। ब्लड कैंसर की शुरुआत भी इसी बोनमैरो से ही होती है। बोनमैरो में स्टेम सेल्स (stem cells) पाए जाते हैं जिससे रक्त कणों का निर्माण होता है। यह स्टेम सेल्स विभाजित (differentiate) होकर मुख्यत तीन प्रकार के रक्त कणों में विभाजित होते हैं।

पहला लाल रक्त कण, दूसरा श्वेत रक्त कण तीसरा प्लेटलेट्स। जब इन रक्त कणों के बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है तब उसे Blood Cancer कहा जाता है। रक्त कणों के वर्गीकरण के हिसाब से ही कैंसर का भी वर्गीकरण किया जाता है।

ब्लड कैंसर मुख्य तीन प्रकार का होता है:

  1. ल्यूकेमिया

2. Lymphoma blood cancer

3.Myeloma

ल्यूकेमिया- रक्त कैंसर क्या है? |( Leukemia-blood cancer in Hindi)

Generally ब्लड कैंसर को ल्यूकेमिया (leukemia) भी कहा जाता है।

ल्यूकेमिया WBC ( वाइट ब्लड सेल) से संबंधित कैंसर है। वाइट ब्लड सेल रोग प्रतिरोध क्षमता का सबसे अहम हिस्सा है। जब कोई भी बाहरी बैक्टीरिया या वायरस शरीर के भीतर प्रवेश करता है ये WBC cells उस परजीवी को समाप्त कर देते हैं। इस प्रकार WBC हमे होने वाले इन्फेक्शन और बीमारियों से बचाते हैं।

वाइट ब्लड सेल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी है। परंतु ब्लड कैंसर में डब्ल्यूबीसी सेल का निर्माण अनियंत्रित गति और तेजी के साथ होता है। जिसके कारण एक स्थान पर इनका जमावड़ा हो जाता है। इसके कारण उस स्थान पर बाकी रक्त कणों की डेंसिटी कम हो जाती है।

Leukemia मुख्यत चार प्रकार का होता है।

Acute myeloid leukemia (AML)

यह सबसे आम प्रकार का ल्यूकेमिया है। यह बच्चों और व्यस्क दोनों में पाया जाता है। यह ज्यादातर 3 से 5 वर्ष के बच्चों में पाया जाता है। यह काफी तेजी से फैलता है। इसकी शुरुआत बोनमैरो मेंं lymphocyte से होती है।

पिछले 5 वर्षों के डाटा के अनुसार AML ल्यूकेमिया से ग्रस्त मरीजों के बचने की संख्या 29.5% है।

AML blood cancer kaise hota hai ?

  • यदि व्यक्ति को पहले कोई कैंसर या कीमोथेरेपी हुई हो।
  • बहुत ज्यादा रेडिएशन के संपर्क में रहने से
  • डाउन सिंड्रोम या अन्य कोई जैनेटिक डिसऑर्डर के कारण

Acute lymphocytic leukemia (ALL)

यह ज्यादातर बच्चों में पाया जाता है। इसकी शुरुआत myeloid cells से होती है।myeloid cells का विभाजन Red Blood cells, White blood cells और platellets में होता है। ALL में इन तीनों रक्त कणों में कमी हो जाती है। यह आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक कि पुरुषों में पाया जाता है। यह महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में अधिक पाया जाता है।

पिछले 5 वर्षों के डाटा के अनुसार ALL ल्यूकेमिया से ग्रस्त मरीजों में बचने की संख्या 69.9 है।

ALL blood cancer kaise hota hai?

  • पहले कैंसर या कीमोथेरेपी हुई हो
  • बेंजीन जैसे कैंसर कारक रसायन के संपर्क में आने से
  • Tobacco / धूम्रपान / निकोटिन
  • डाउन सिंड्रोम या अन्य जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण

Chronic myeloid leukemia (CML)

Leukemia Cancer में यह सबसे आम प्रकार है। इसकी शुरुआत बोनमैरो के lymphocytes से होती है। इससे ग्रस्त रोगी के शरीर में 1 साल तक कोई लक्षण देखने को नहीं मिलता है। यह अक्सर 70+ उम्र के लोगों में पाया जाता है।

पिछले 5 वर्षों के डाटा के अनुसार CML ल्यूकेमिया से ग्रस्त मरीजों में बचने की संख्या 70.6% है।

Chronic lymphocytic leukemia (CLL)

AML की तरह ही इसकी शुरुआत अस्थि मज्जा (Bone marrow) के myeloid सेल से होती है। परंतु इसके फैलने की गति यह AML के मुकाबले कम होती है। यह ज्यादातर वयस्कों में पाया जाता है। परंतु इसका शिकार बच्चे भी होते हैं।

पिछले 5 वर्षों के डाटा के अनुसार CLL ल्यूकेमिया से ग्रस्त मरीजों में बचने की संख्या 87.2% है।

Lymphoma

Blood Cancer का यह प्रकार lymph system को प्रभावित करता है। lymph सिस्टम में lymph nodes, spleen, and thymus gland आती हैं।

Lymphoma blood cancer दो प्रकार का होता है!

Hodgkin’s lymphoma– इसकी शुरुआत immune cells के B lymphocytes या B cell से होती है। ये cells एंटीबॉडीज का निर्माण करते हैं।

Non-Hodgkin’s lymphoma– इसकी शुरआत इम्यून सेल्स के B cells और T cells से होती है। Non-Hodgkin’s lymphoma प्रकार का कैंसर Hodgkin’s lymphoma कैंसर के मुकाबले ज्यादा common है।

Myeloma

यह बोनमैरो के प्लाज्मा सेल से संबंधित कैंसर है। प्लाजमा सेल्स डब्लू.बी.सी का प्रकार है जो एंटीबॉडीज का निर्माण करते हैं। ‌इसमें bone marrow के साथ-साथ हड्डियों को भी नुकसान होता है।

Risk Factors (जोखिम कारक) Of Leukemia ?

रिस्क फैक्टर्स ऐसे कारण होते हैं जिनके मौजूद होने से किसी विशेष बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है। रिस्क फैक्टर्स का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि यदि यह फैक्टर्स किसी व्यक्ति में मौजूद है तो वह उस बीमारी से ग्रस्त होगा। परंतु इसकी अधिक संभावना है कि उसको भविष्य में यह बीमारी हो सकती है। ‌

ब्लड कैंसर की रिस्क फैक्टर्स

कैंसर संबंधित इतिहास

यदि कोई व्यक्ति पहले किसी कैंसर से पीड़ित हुआ हो या उसकी कीमोथेरेपी हुई हो। तो इस बात की है संभावना बढ़ जाती है की उसे भविष्य में ब्लड कैंसर हो सकता है।

जेनेटिक विकार (Genetic disorder)

कुछ खास प्रकार के जेनेटिक डिसऑर्डर्स ब्लड कैंसर से संबंधित पाए गए हैं। जेनेटिक डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्तियों में ब्लड कैंसर होने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है।

रेडिएशन के संपर्क में आने से

रेडिएशन यानी कि विकिरण तरंगों के संपर्क में आने से किसी भी प्रकार के कैंसर के होने का खतरा बढ़ जाता है। अल्ट्रावॉयलेट किरणें और अन्य प्रकार की विकिरण तरंगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए।

कैंसर कारक केमिकल

कैंसर कारक केमिकल जैसे कि बेंजीन के संपर्क में आने से कैंसर होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसके साथ-साथ इंसेक्टिसाइड और पेस्टिसाइड में भी कैंसर कारक केमिकल का इस्तेमाल होता।

वंशावली

यदि व्यक्ति के close blood relation वाले व्यक्ति को ल्यूकेमिया हो तो ब्लड कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। close blood relation का अर्थ होता है माता, पिता या फिर भाई बहन।

ब्लड कैंसर से बचाव के तरीके?

Blood cancer बहुत ही तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है। विश्व का कोई ऐसा देश नहीं है जहां पर ब्लड कैंसर का कोई मरीज ना हो। ब्लड कैंसर व्यापक रूप से फैलती जा रही है। ब्लड कैंसर होने का अभी तक ठीक से पता नहीं है। परंतु कुछ अनुमानों और रिसर्च के मुताबिक निम्नलिखित तरीकों को अपनाकर कैंसर से बचाव किया जा सकता है।

Radiation

ब्लड कैंसर मुख्यत रेडिएशन से होता है। इसलिए रेडियशन से बचना चाहिए। रेडिएशन सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से भी हो सकता है। ऐसी जगह जहां पर ओजोन की परत पतली होती है वहां पर लोगों को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।

alpha rays, gama rays, x-rays, alpha particles, beta particles यह सब भी रेडिएशन का प्रकार है। जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

Junk Foods

तैलीय भोजन में अधिक मात्रा में प्रिजर्वेटिव और हानिकारक कैमिकल मिलाए जाते हैं। कुछ junk Foods में हेवी मेटल जैसे कि arsenic, lead (सीसा), मर्करी भी पाया जाता है। यह सभी केमिकल कैंसर का कारण बनते हैं। इसलिए जंक फूड से परहेज करना चाहिए।

Sodium

भोजन में सोडियम की ज्यादा मात्रा का इस्तेमाल ना करें। अधिक सोडियम का सेवन indirectly कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। कई रिसर्च में ऐसा पाया गया है कि सोडियम कई गंभीर समस्याओं को जन्म देता है जैसे कि हाई बीपी, किडनी डैमेज और यहां तक कि कैंसर भी।

Tran Fats

Processed Foods में trans fat अधिक मात्रा पाए जाते हैं। इसलिए ट्रांस फैट युक्त processed Foods से भी परहेज रखें।

Smoking

धूम्रपान से बचें। धूम्रपान कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। सिगरेट में मौजूद निकोटीन 500 से भी अधिक गंभीर समस्याओं को जन्म देता है। तंबाकू भी सेहत के लिए हानिकारक है और कैंसर का कारण बनता है।

ब्लड कैंसर में क्या खाना चाहिए ? ( What to eat in blood cancer)

Organic Foods

खाने में ऑर्गेनिक जैविक फलों का इस्तेमाल करें। फलों सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धो लें। सब्जियों में छिड़का जाने वाला इंसेक्टिसाइड कैंसर कारक है।

Iron Rich Foods

ब्लड कैंसर से ग्रस्त व्यक्ति पूरी तरह सूख जाता है। इसलिए डॉक्टर उसको अच्छी डाइट लेने की सलाह देते हैं। ब्लड कैंसर ग्रस्त व्यक्ति को आयरन युक्त भोजन ग्रहण करना चाहिए। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसायुक्त भोजन का सेवन करें।

Antioxidants

फलों और सब्जियों में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। यह खनिज तत्व कैंसर विरोधी होते हैं। यह कैंसर सेल्स को खत्म करते हैं। आप डाइट में विशेष रुप से एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल जैसे कि नींबू, मुसम्मी, संतरा, पाइनएप्पल, एपल, गाजर, पालक को जरूर शामिल करें।

Water

समय-समय पर पानी पिए। कीमोथेरेपी के बाद डिहाइड्रेशन होने की समस्या बढ़ जाती है। कीमोथेरेपी के बाद त्वचा भी सिकुड़ जाती है। त्वचा को वापस नॉर्मल करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीना जरूरी है।

प्रोटीन

कीमोथेरेपी के दौरान शरीर के Muscle mass में काफी गिरावट आती है। शरीर पूरी तरह सूख जाता है। इसलिए muscle mass वापस regain करने के लिए प्रोटीन युक्त भोजन काफी जरूरी है।

किसी भी गंभीर बीमारी से रिकवर करने के लिए डॉक्टर प्रोटीन युक्त भोजन सेवन करने की सलाह देते हैं। जैसे रेड मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स, अण्डे, मछलियों का मांस( sardines, रोहू, कटला), ड्राई फ्रूट्स (अखरोट, बादाम, पिस्ता, ब्राजीलियन नट्स)

फाइबर युक्त भोजन

कीमोथेरेपी से ऊभरे पेशेंट्स में अक्सर यह पाया जाता है कि उन्हें उल्टी और भूख ना लगने की समस्या होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कीमोथेरेपी के दौरान शरीर में बहुत सारे केमिकल्स इंजेक्ट किए जाते हैं।

केमिकल्स के प्रभाव के कारण ही कुछ भी खाने का मन नहीं करता है। शरीर से केमिकल बाहर निकालने के लिए फाइबर युक्त भोजन लेने की सलाह दी जाती है।

इम्यूनिटी वर्धक Foods

कीमोथेरेपी से पहले रोगी के इम्यून सिस्टम को depress करने के लिए कुछ दवाइयां दी जाती है। इसलिए कीमोथेरेपी से उभरे हुए पेशेंट्स की इम्यूनिटी थोड़ी weak हो जाती है। चिकित्सक ऐसे पेशेंट्स को immunity boosting दवाइयों के साथ इम्यूनिटी वर्धक भोजन लेने की भी सलाह देते हैं।

ब्लड कैंसर का पता कैसे लगाया जाता है? | How Blood Cancer is Diagnosed in Hindi?

ब्लड कैंसर उपचार में देरी होने पर जानलेवा साबित होता है। इसलिए ब्लड कैंसर के लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टरी जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर ब्लड कैंसर का पता लगाने के लिए निम्नलिखित जांच करते हैं।

Physical Examination ( शारीरिक परीक्षण) –

ब्लड कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे पहले डॉक्टर शारीरिक निरीक्षण करते हैं। ब्लड कैंसर से ग्रस्त रोगी में निम्नलिखित विशेष लक्षण होते हैं जिसकी डॉक्टर जांच करता है।

एनीमिया के कारण सफेद पड़ चुकी त्वचा
पूरे शरीर में फुलावट और सूजन
lymph nodes में सूजन
Liver और spleen का आकार बड़ा होना

Blood test ( रक्त निरीक्षण)

फिजिकल एग्जामिनेशन में संदेह होने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। टेस्ट में असामान्य रक्त कणों की संख्या देखकर डॉक्टर ब्लड कैंसर होने की संभावना का पता लगाते हैं। परंतु हर प्रकार के कैंसर cells पूरे शरीर में नहीं पाए जाते हैं। कैंसर कारक ब्लड सेल केवल एक अंग तक भी सीमित हो सकते हैं।

बोनमैरो टेस्ट

ब्लड टेस्ट में ब्लड कैंसर कंफर्म ना होने पर डॉक्टर bone marrow test recommend करते हैं। इस टेस्ट के लिए सैंपल हिप बोन के बोन मैरो से लिया जाता है। कई प्रकार के टेस्ट से डॉक्टर ब्लड कैंसर ट्रीटमेंट के लिए इलाज recommend करते हैं।

ब्लड कैंसर का उपचार

Chemotherapy

ब्लड कैंसर का उपचार करने के लिए सबसे ज्यादा कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। कीमोथेरेपी में कैंसर कारक सेल्स को खत्म करने के लिए केमिकल्स को दवाइयों के रूप में या फिर नसों में इंजेक्ट किया जाता है।

Targeted therapy

टारगेटेड थेरेपी का इस्तेमाल करके abnormal सेल्स को नष्ट किया जाता है। दवाइयों का इस्तेमाल करके कैंसर युक्त सेल्स को नष्ट कर दिया जाता है।

Radiation therapy

रेडिएशन थेरेपी में एक्स-रे किरणों का इस्तेमाल करके कैंसर कारक सेल्स को नष्ट कर दिया जाता है। रेडिएशन थेरेपी देते वक्त मरीज को एक बड़ी सी मशीन में लिटाया जाता है। उसके बाद X- ray किरणों को कैंसर कारक सेल्स के ऊपर छोड़ा जाता है। एक्स-रे की किरणों से कैंसर का लक्षण तुरंत नष्ट हो जाते हैं।

Bone marrow transplant

बोन मैरो से उत्पन्न होने वाले कैंसर को ठीक करने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। कैंसर कारक बोन मैरो को निकालकर स्वस्थ बोन मैरो का इस्तेमाल किया जाता है। बोन मैरो के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के बोन मैरो या फिर खुद के स्वस्थ बोन मैरो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Immunotherapy

इम्यूनोथेरेपी में कुछ ऐसी दवाइयां दी जाती है जिससे इम्यून सिस्टम कैंसर कारक सेल्स को खुद नष्ट करने लगता है।

ब्लड कैंसर के लक्षण (Symptoms of Blood Cancer/ Leukemia in Hindi)

ब्लड कैंसर एक काफी गंभीर बीमारी है जो कि अंदरूनी होती है। इसके ऐसे शारीरिक लक्षण नहीं है जिसको देखकर यह पूरी तरह कंफर्म किया जा सके कि व्यक्ति ब्लड कैंसर से जूझ रहा है। परंतु फिर भी ब्लड कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं जो कि आमतौर पर सभी रोगियों में पाए जाते हैं।

  1. रात्रि में बहुत ज्यादा पसीना आना, पूरा शरीर पसीने से भीग जाना जिसे night sweats कहा जाता है।
  2. शरीर में हमेशा थकान महसूस होना, जो rest करने पर भी खत्म नहीं होती है।
  3. शरीर का सफेद पड़ना। ब्लड कैंसर रोगी का शरीर श्वेत रक्त कणों की संख्या बढ़ने से शरीर सफेद पड़ने लगता है।
  4. रक्त कणों की अत्यधिक निर्माण से पूरे शरीर में फुलावट आ जाती है और कहीं कहीं सूजन भी महसूस होती
  5. लीवर और spleen में सूजन

Conclusion Of Blood Cancer kaise Hota hai

ब्लड कैंसर कैसे होता है; यह जानकर ब्लड कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस आर्टिकल में हमने ब्लड कैंसर से जुड़े हर छोटे-बड़े facts को जाना। ‌

हमने यह भी जाना ब्लड कैंसर क्या होता है, ब्लड कैंसर कैसे होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

हर वर्ष लाखों लोग ब्लड कैंसर से अपनी जान गंवाते हैं। इसलिए हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम “ब्लड कैंसर कैसे होता है” इसके प्रति जागरूकता फैलाए।

ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आप इस आर्टिकल “ब्लड कैंसर कैसे होता है” को जरूर शेयर करें।

FAQ

ब्लड कैंसर टेस्ट कैसे किया जाता है?

लक्षणों के आधार पर ब्लड कैंसर टेस्ट किया जाता है। ब्लड कैंसर टेस्ट करने के लिए कई अलग अलग तरीके हैं। लक्षण पाए जाने के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग प्रकार के टेस्ट लिख सकता है जैसे कि- Physical Examination Blood test Bone Marrow test

ल्यूकेमिया किसके कारण होता है?

ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर होने का अभी तक कोई ठीक ठीक जानकारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि कैंसर होने का कारण cancer causing factors होते हैं जैसे कि रेडिएशन, निकोटीन, स्मोकिंग, फैमिली हिस्ट्री आदि।

किसका उपयोग रक्त कैंसर के उपचार में किया जाता है?

रक्त कैंसर का उपचार करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि- Chemotherapy Targeted therapy Radiation therapy Bone marrow transplant Immunotherapy

ब्लड कैंसर स्टेज क्या होता है?

कोई भी कैंसर शरीर में धीरे-धीरे फैलता है शरीर में कैंसर फैलने के आधार पर कैंसर की स्टेज को विभाजित किया जाता है। आमतौर पर कैंसर की फर्स्ट स्टेज, सेकंड स्टेज और एडवांस स्टेज होती है। ज्यादातर रोगियों में कैंसर का पता सेकंड स्टेज और एडवांस स्टेज में ही लग पाता है। यदि कैंसर का पता फर्स्ट स्टेज में लग जाए तो रोगी के बचने की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है। एडवांस स्टेज के रोगी के बचने की संभावना काफी कम होती है।

ब्लड कैंसर का इलाज संभव है या नहीं?

हर वर्ष लाखों मरीज ब्लड कैंसर से ठीक हो कर स्वस्थ घर वापस लौटते हैं। मेडिकल टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट के साथ-साथ ब्लड कैंसर से होने वाली मौतों में गिरावट आई है। ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण नजर आते ही जांच करा लेनी चाहिए। क्योंकि शुरुआती स्टेज में कैंसर का इलाज काफी हद तक संभव।

ALL जीवित रहने की दर क्या है?

ALL leukemia कैंसर का प्रकार है। पिछले 5 वर्षों के डाटा के अनुसार ALL ल्यूकेमिया से ग्रस्त मरीजों में बचने की संख्या 69.9% है।

ये भी पढ़े : (933)LIC जीवन लक्ष्य योजना से फायदा कैसे मिलेगा 

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